राजनैतिक दबाव व जातिगत समीकरण में फंसे मैहर तहसीलदार

मनोज गौतम की रिपोर्ट
राजनैतिक दबाव व जातिगत समीकरण में फंसे मैहर तहसीलदार
अतिक्रमण का शिकार राम मंदिर नरोरा का चर्चित मामला
मैहर तहसीलदार ने जारी किया अतिक्रमण हटाने को लेकर आदेश एवं बेदखल वारंट
सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गया राम मंदिर नरौरा का अतिक्रमण
दबंगों को मिल रहा राजनैतिक व जातिगत दबाव पर प्रशासनिक संरक्षण
सतना:- जिले के तहसील मैहर अंतर्गत स्थित ग्राम पंचायत नरोरा में स्थापित राम मंदिर के जमीनी विवाद को लेकर अतिक्रमण हटाए जाने का मामला इन दिनों खबरों में प्रकाशित होकर काफी चर्चित है। इस मामले को लेकर न्यायालय तहसीलदार तहसील मैहर द्वारा अतिक्रमण हटाने को लेकर लिखित आदेश के साथ बेदखली वारंट भी जारी किया गया। जिस पर दिनांक 04/04/23 को अतिक्रमण हटाने की बात कहते हुए राम भक्तों को आश्वासन दिया गया। लेकिन आज तक किसी भी प्रशासनिक अमला द्वारा अवैधानिक कब्जे को लेकर शासकीय मुआयना कर अर्थ दंडित के साथ वार्निग लेटर जारी करने के बाद भी दबंगों का राम मंदिर की जमीन में अवैध कब्जा कर खुला संरक्षण व्याप्त है। इस बात को लेकर राम भक्त नरोरा वासियों का यह मानना है की मैहर तहसीलदार को किसी ना किसी राजनैतिक एवं जातिगत दबाव में आकर राम मंदिर नरोरा की जमीन का अतिक्रमण सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है। लोगों का कहना है की यदि न्यायालय तहसीलदार मैहर द्वारा जारी आदेश एवं बेदखली वारंट को लेकर हम लोगों के साथ इसी तरह राजनैतिक एवं जातिगत खेल खेला गया तो हम सभी राम भक्त नरोरा ग्राम वासियों को उच्च न्यायालय में अपनी मांगों लेकर न्याय की गुहार के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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