अधिकारियों के द्वारा अपनी गलती को छुपाने के लिए छात्रों को दोषी ठहराया जा रहा है

मैहर से कृष्ण कुमार पांडेय
स्कारशिप की समस्या से जूझ रहे छात्रों की समस्या का निराकरण करने के बजाय छात्रों को दोषी ठहराया जा रहा है क्यू
जबकि सच यह की कॉलेज में पड़ने वाले छात्रों का डाटा अपलोड करना कॉलेज या विश्विद्यालय का काम होता है नकी छात्रों का होता है यदि विश्विद्यालय प्रशासन और हायर एजुकेशन के अधिकारियों के द्वारा समय पर डाटा अपलोड करवा। दिया जाता तो छात्र अपना फार्म भर सकते थे लेकिन यहां पे अधिकारियों द्वारा अपनी गलती छुपाने के लिए छात्रों को क्यू दोषी ठहराया जा रहा है
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में लॉ डिपार्ट मेट्स के जितने भी ओबीसी एससी एसटी के छात्र है उनका तीन साल से फार्म नही भरा गया है कारण यह कि नोडल अधिकारी द्वारा डाटा अपलोड नही किया गया था जिसके कारण हम सभी छात्र वंचित है यदि समय पर डाटा अपलोड होता तो यह आज ये नौमति नही आती इस समस्या से छात्रों को जूझना नही पड़ता जब समय में पोर्टल खुला था तब हम लोगो ने *फार्म को भरने का प्रयास किया था* लेकिन डाटा अपलोड कराने का काम विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारियों का होता है और हायर एजुकेशन के नोडल अधिकारियों का नकी छात्रों का 2020 से लेकर 22 तक डाटा अपलोड करवा दिया जाए नोडल अधिकारियों के द्वारा फिर पोर्टल खुलवा के हम छात्रों का फार्म भरा जा सकता है
और स्कॉलर शिप की समस्या का निराकरण किया जा सक्ता है फार्म भर जाए गा तक स्कॉलर सिप की राशि को खाते डाल दिया जाए
कुछ छात्रों का अभी कुछ दिन पहले डाटा अपलोड करवा दिया
गया है लेकिन पोर्टल बंद होने के कारण से फार्म नही भरे जा रहे है इस कारण से समस्या बनी हुई है
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