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आरटीई के तहत विद्यालयों में नहीं मिल पाया शत प्रतिशत प्रवेश

(रीवा) इसे अशासकीय विद्यालयों की उदासीनता कहें या शिक्षा तंत्र की नाकामी, कुछ कारण अवश्य है जिससे आरटीई की प्रदेश भर में सीटें रिक्त हैं। यहां यह बता दें की आरटीई के अंतर्गत बीपीएल परिवारों के बच्चों एवं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों को अशासकीय विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश मिलता है। गौरतलब है कि गत सत्र में आरटीई के तहत लगभग डेढ़ महीने तक प्रवेश दिया गया था किंतु इस बार केवल दस दिनों के लिए ही पोर्टल खुला, इस कारण से लगभग 50प्रतिशत विद्यार्थी प्रवेश पाने से वंचित रह गए।

रिक्त सीटों को भरा जाए-
इस संबंध में जब आसपास के अभिभावकों से चर्चा की गई तो अधिकांश ने यह स्वीकार किया कि यह शासन की अति महत्वपूर्ण योजना है। इसके लागू होने के बाद वे बच्चे भी अशासकीय विद्यालयों में पढ़ पा रहे हैं जिन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। अधिकांश वर्ग यह भी मानता है कि ऐसी योजनाओं का प्रचार प्रसार होना चाहिए, किंतु उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि जब तक विद्यालयों की रिक्त सीटें न भर जाएं तब तक बच्चों को प्रवेश मिलना चाहिए।
मैहर से बद्री पाठक की रिपोर्ट

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