बैतूलमध्य प्रदेश

अवैध साहूकारों के लिए वरदान साबित होता चैंक बाउंस कानून गैरंटर पर चलता मुकदमा, कंचन को सता रहा कानून का डर

अवैध साहूकारों के लिए वरदान साबित होता चैंक बाउंस कानून गैरंटर पर चलता मुकदमा, कंचन को सता रहा कानून का डर

जिला ब्यूरो चीफ अनिल दवन्डे बैतूल

बैतूल। मप्र राज्य। परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 अवैध साहूकारों के लिए वरदान साबित हुआ हैं जिसके जारिए काले धन की वसूली आसानी से हो जाती हैं। कानून में बड़ी धनराषि का नगद लेन देन अपराध हैं लेकिन अवैध साहूकार लाखों रूपए का नगद लेन देन करते हैं। नगद रकम उधार देते समय ऋणी का हस्ताक्षर युक्त 02 चैंक एवं गैरंटर का 01 एक चैंक लेकर साहूकार रख लेता हैं। चैंक का दुरूपयोग तो होता हैं लेकिन अदालत में दुरूपयोग साबित करना कठिन हैं जिसके चलते चैंक जारीकर्ता को 02 वर्ष तक का कारावास और चैंक राषि का दुगुनी राषि तक का अर्थदण्ड की सजा हो जाती हैं। चैंक बाउंस का परिणाम का डर साहूकार की वसूली करवाता हैं। सरकार के साहूकारी अधिनियम 1934 एवं ऋणियों का संरक्षण कानून 1937 बेअसर साबित हो रहे हैं।
बैतूल नगर की तिलक वार्ड निवासी कंचन गौर को 01 लाख रूपए उधार देते समय साहूकार अखिलेष शर्मा अमानत बतौर 02 चैक और गैरंटर धीरेन्द्र अवस्थी के 01 चैंक एवं हस्ताक्षर युक्त स्टांप पेपर लेकर 28.02.2020 को रख लिए थें। चैंक से गैरंटर के खाते में 01 लाख रूपए जमा करवाए गए। कंचन गौर बताती हैं कि 05 हजार रूपए मासिक ब्याज अदा करती रहीं हैं और 02 लाख रूपए अदा कर चुकी हैं। साहूकार ने 01 लाख 70 हजार रूपए बकाया राषि की मांग रखी तो विवाद खड़ा हो गया।
साहूकार ने सबसे पहला अपना षिकार गैरंटर को बनाया। गैरंटर के हस्ताक्षर युक्त स्टांप पेपर पर 29.04.2020 पर ब्याना चिट्ठी लिखी गई जबकि देष भर में कोरोना लाकडाउन चल रहा था। आगे जाकर संपत्ति शीतल बिल्डर्स एवं डेवलपर्स फर्म को 15.07.2020 को रजिस्ट्री कर दी गई। ब्याना चिट्ठी में 03 लाख 80 हजार रूपए चैंक एवं नगद रकम के माध्यम से अदा करना बताया गया हैं और 12 लाख 20 हजार रूपए रजिस्ट्री समय अदा करना था। साहूकार अपनी पार्टनरषिप फर्म के नाम पर रजिस्ट्री करवाते समय 16 लाख 86 हजार 788 रूपए धीरेन्द्र अवस्थी को अदा करता हैं जिसमें 86 हजार 788 रूपए पूर्व में अदा करना बताता हैं। कानून और न्याय का सवाल यह हैं कि पूर्व में अदा की गई राषि कौनसी हैं? रजिस्ट्री 12 लाख 20 हजार रूपए में क्यों नहीं करवाई गई थी?
साहूकार और कंचन गौर के बीच विवाद के चलते साहूकार 28.02.2020 के स्टांप पेपर पर 29.04.2020 को लिखी गई ब्याना चिट्ठी को आधार बनाकर गैरंटर धीरेन्द्र अवस्थी पर 03 लाख रूपए के चैंक बाउंस का मुकदमा लेकर आ जाता हैं। गैरंटर धीरेन्द्र अवस्थी चैंक बांउस में फंस चुके हैं तो कंचन गौर को 02 चैंक के कारण डर सता रहा हैं। साहूकार वसूली के तमाम हथकण्डे अपना रहा हैं।
साहूकार से पीड़ितो की संख्या बड़ी हैं। तिलक वार्ड निवासी रफीक खान पिता अजीज खान पर साहूकार अखिलेष शर्मा 05 लाख 50 हजार रूपए के चैंक बाउंस का मुकदमा चला चुका हैं। तहसील भैसदेही पो0 चूनालोमा ग्राम प्रभुढ़ाना के अरूण येवले पर 10 लाख रूपए के चैंक बाउंस का मामला साहूकार चला चुका हैं। कोठी बाजार निवासी गौरव देषमुख पर 70 हजार रूपए के चैंक बाउंस का मामला चला चुका हैं। चैंक बाउंस के और भी मामले साहूकार पूर्व में चला चुका हैं।
पुलिस थाना बैतूल में कंचन गौर की रिपोर्ट पर केवल जॉच चल रही हैं। पुलिस अधीक्षक बैतूल को धीरेन्द्र अवस्थी चैंक के दुरूपयो की षिकायत ठण्डे बस्ते में हैं। अवैध साहूकारी का मामला हो तो पुलिस एैसे ही काम करती हैं। कलेक्टर बैतूल को चैंक बाउंस पीड़ित धीरेन्द्र अवस्थी की षिकायत में अवैध साहूकारी के प्रमाण दिए गए हैं जिसकी जॉच एसडीएम बैतूल कर रहे हैं लेकिन कार्यवाही कच्छप चाल से चली जा रहीं हैं। इससे तो लगने लगा हैं कि कानून के हाथ ना तो लंबे हैं और ना तो मजबूत हैं।

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