बैतूलमध्य प्रदेश

ठेकेदार और वाहन मालीक को लाभ पहुचाने चालक पर क्यो डाला जाता है बोझ

अनुबंधित मिलरों , शासकीय राशन रैंको , वेयरहाउसो , गोदामो से निकलने वाले वाहनो पर क्यो नही है दिया जाता ध्यान….?

बैतुल :- विडंबना यह है कि ओवरलोडिंग के मामले में सरकारी विभाग सबसे आगे हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी में सामने आया कि जिले में जब राशन का उठाव होता है तो डीलर के द्वारा अनुबंधित मिलर और जहा से राशन की रैक लगती है वहां से ही बड़ी-बड़ी गाड़ियों को ओवरलोड करके राशन संबंधित वेयरहाउसो और गोदामो में पहुंचाया जाता है। जिसमें कुछ वाहन अनुबंधित होते हैं और कुछ वाहन अनुबंधित नहीं होते परंतु ओवरलोडिंग करके वाहन को चलाना अपराध की श्रेणी में आता है। जिस पर नकेल कसने का कार्य परिवहन विभाग का होता है। यदि उन तमाम मिलरो पर प्रथम प्राथमिकता में ध्यान दिया जाए तो ओवरलोडिंग का कोई मामला सामने नहीं आ सकता परंतु ऐसा नही होता। शासन के कुछ जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी सामने रहकर संबंधित वाहनों में ओवरलोडिंग करवा कर माल भेजने का कार्य करते हैं। जिसका पूरा लाभ सम्बंधित ठेकेदार और वाहन मालिक को लाभ पहुंचाने के लिए चालक पर बढ़-चढ़कर बोझ डाला दिया जाता है। जो नियम के विरुद्ध है। ऐसे वाहनों पर परिवहन विभाग द्वारा कार्यवाही कर नियमानुसार जुर्माने की राशि वसूल करनी चाहिए। जिससे कि चालक और क्षेत्र की सड़कें अपने आप को सुरक्षित महशुस कर सके। जिसकी प्रशासन और सरकार को कोई चिंता नही है।इसका सीधा सा मतलब है कि सरकार को सिर्फ राजस्व के जरिए हो रही कमाई से मतलब है, न कि नियम-कायदों से। कार्रवाई का अधिकार आरटीओ को है। लेकिन अब तक किसी सरकारी वाहन पर चालान की बात सामने नहीं आई है, जबकि हर दिन ओवरलोड वाहन कायदों को कुचलकर पूरी रफ्तार से दौड़ रहे हैं। हैरानी की बात जब इनमें से कई गाडिय़ां अनुबंधित होती हैं। तो कई अनुबंधित नजर नही आती परन्तु शासकीय राशन लेकर शासकीय गोदामो में राशन पहुचाने का काम करते है।राशन या अन्य वस्तुओं की ट्रांसपोर्टिंग कर रहे सभी सरकारी सेवार्थ अनुबंधित , नान अनुबंधित वाहन ओवरलोड ही चलते नजर आते हैं। शासकीय संस्थानों में नागरिक आपूर्ति निगम, जिला विपणन कार्यालय ओवरलोडिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। जबकि मिलरों से निकले वाले वाहनों पर सम्बंधित विभाग द्वारा अपना ध्यान आकर्षित करना चाहिए।कभी-कभी सक्रिय होने वाला आरटीओ सरकारी सेवार्थ में अनुबंधित वाहनों पर कार्रवाई करता कभी नजर नहीं आया है।शहर समेत जिले की सड़कों पर दौड़ रही ओवरलोड गाडिय़ां इस बात का प्रमाण हैं।

 

*सेंटरों पर नही अनुबंधित वाहनों की जानकारी*

विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी में सामने आया कि जिले के अधीनस्थ कार्यरत सेंटरों पर अनुबंधित वाहनों की कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं होती कि किस वाहन की कितनी पासिंग परिवहन विभाग द्वारा तय की गई है। सेंटरों पर अनुबंधित वाहनों की सूची नहीं होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है। जबकि जिला प्रबंधन विभाग द्वारा समस्त सेंटरों को उनके क्षेत्र में अनुबंधित वाहनों की जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। जिससे कि उन्हें भी यह पता हो सके कि कौन सा अनुबंधित वाहन कितना राशन ले जा सकता है।

 

*चालकों ने बताया अपना दुःख*

मिलरो और वेयरहाउसों तथा गोदामो से निकलकर जिले की सड़कों पर दौड़ रहे शासकीय राशन भरकर वाहनों के कुछ वाहन चालकों से जब बात की तो चालकों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर अपना दुख बयां करते बताया कि हम तो मजदूर है साहब। मालीक का जो आदेश होता है हमें वह काम करना पड़ता है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए जान हथेली पर रखकर वाहनों को चलाते हैं। परन्तु हमारी सुरक्षा के बारे में कोई नही सोचता। हालांकि उक्त मामले पर जब कुछ दिन पहले ही जिला परिवहन अधिकारी बैतूल एवं जिला प्रबंधक बैतूल से उक्त शासकीय सेवार्थ अनुबंधित वाहनों के ओवरलोडिंग के मामले पर चर्चा की गई थी। तो बताया गया था कि ओवरलोडिंग रोकने और ओवरलोड वाहनों की जांच कर कार्यवाही करने के लिए निर्देशित करने की बात कही थी। साथ ही इधर जिला प्रबन्धक द्वारा वाहनों में ओवरलोड राशन न भरने के लिए विभागीय निर्देश जारी करने की बात कही थी। परंतु ऐसा कोई निर्देश या आदेश अभी तक सामने नहीं आया।

India News Darpan

नोट :- अन्य अपडेट लगातार पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमें ट्वीटर पर भी फॉलो कर सकते हैं| नवीनतम वीडियो न्यूज देखने के लिए हमें यूटूब (Youtube) पर सब्सक्राइब करें।

Related Articles

Back to top button