
महर्षि महेश योगी के सपने को धूमिल कर रहे वर्तमान विवि प्रबंधन के लोग: विधानसभा और वार्षिक रिपोर्ट के छात्र आंकड़ों में भारी हेरफेर, शिकायत के बाद 87 हजार से ज्यादा छात्र रिकॉर्ड से गायब
इंडिया न्यूज़ दर्शन कटनी ढीमरखेड़ा से संवाददाता सोमनाथ पटेल
कटनी।
महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय (कटनी) के छात्र प्रबंधन और वार्षिक आंकड़ों को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। विश्वविद्यालय के ही निदेशक सुधाकर सिंह राजपूत द्वारा 23 अप्रैल 2026 को की गई एक बेहद गंभीर और विस्तृत शिकायत के बाद यह मामला उजागर हुआ है।
अपनी शिकायत में निदेशक राजपूत ने बेहद भावुक और कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि वर्तमान विश्वविद्यालय प्रबंधन के लोग पूज्य महर्षि महेश योगी जी के पवित्र सपने और उनके द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों को पूरी तरह धूमिल कर रहे हैं। जिस संस्थान की नींव वैदिक ज्ञान और उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रसार के लिए रखी गई थी, उसे आज कुछ लोगों द्वारा भ्रामक आंकड़ों और प्रशासनिक अनियमितताओं का केंद्र बना दिया गया है।
उच्च अधिकारियों और संवैधानिक पदों से की गई शिकायत
सुधाकर सिंह राजपूत ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई के लिए देश और राज्य के सर्वोच्च पदों पर आसीन निम्नलिखित अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजा है:
* महामहिम राष्ट्रपति महोदया, भारत सरकार (राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली)
– माननीय मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली)
* महामहिम राज्यपाल महोदय, मध्य प्रदेश शासन (राजभवन, भोपाल)
* माननीय मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक (DGP), मध्य प्रदेश शासन
* माननीय अध्यक्ष एवं सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC, नई दिल्ली)
* उच्च शिक्षा विभाग एवं मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन
विधानसभा में कुछ और, वार्षिक रिपोर्ट में कुछ और आंकड़े!
शिकायत में दस्तावेज़ों के आधार पर बताया गया है कि मध्य प्रदेश विधानसभा के सत्र में पूछे गए एक तारांकित प्रश्न (क्रमांक 1780, फरवरी 2024) के जवाब में सरकार की ओर से बताया गया था कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 के दौरान विश्वविद्यालय में:
* नियमित (Regular) पाठ्यक्रमों के छात्र: 12,325
* दूरस्थ (Distance) शिक्षा के छात्र: 60,399
* कुल छात्र संख्या: 72,724
इसके विपरीत, जब विश्वविद्यालय की उसी शैक्षणिक सत्र (2023-24) की वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) की जांच की गई, तो वहां आंकड़े पूरी तरह बदल गए। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार:
* नियमित छात्र: 10,818
* स्वाध्यायी (Private) छात्र: 79,326
* कुल छात्र संख्या: 90,144
मात्र कुछ महीनों के भीतर 87,110 छात्रों की रहस्यमयी कमी
शिकायत में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह उठाया गया है कि जुलाई 2025 में विधानसभा के ही एक अन्य प्रश्न (क्रमांक 505 और 506) के उत्तर में विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की कुल संख्या अचानक मात्र 1,417 और 1,924 दर्शाई गई।
शिकायतकर्ता ने तीखा सवाल उठाया है कि एक ही समान शैक्षणिक सत्र के संबंध में अलग-अलग संवैधानिक और प्रशासनिक पटल पर इतने विरोधाभासी आंकड़े क्यों पेश किए गए? मात्र कुछ महीनों के अंतराल में कुल 87,110 विद्यार्थियों की भारी कमी या अंतर आने का वास्तविक कारण क्या है?
वैदिक संस्थान की गरिमा को ठेस और वित्तीय गड़बड़ी की आशंका
निदेशक राजपूत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा छात्र संख्या को जानबूझकर छिपाया या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है। यह सीधे तौर पर माननीय न्यायालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और विधानसभा जैसे उच्च संवैधानिक निकायों को गुमराह करने का एक संगठित प्रयास प्रतीत होता है, जिसके पीछे करोड़ों रुपये के शुल्क (फीस) और फंड का हेरफेर होने की गंभीर आशंका है। प्रबंधन की ये कृत्य संस्थान की छवि को मटियामेट कर रहे हैं।
इस शिकायत के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग और नियामक आयोगों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की गहन भौतिक और प्रशासनिक जांच कराकर दोषियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988’ और भारतीय दंड संहिता (IPC) की प्रासंगिक धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि पूज्य महर्षि जी के नाम और विश्वविद्यालय की गरिमा को बचाया जा सके।
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