स्वयंभु हनुमान जी के दर्शन से होती है मन्नत पूरी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में लमगांव में स्थित हनुमान मंदिर में रखी मूर्ति की वजह से काफी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है की मंदिर में रखी मूर्ति का आकार समय के साथ बढ़ रहा हैं, जब इस मूर्ति की स्थापना मंदिर में की गई थी तब लगभग 1-1.5 फीट का था लेकिन अब बढ़कर लगभग 3-4 फीट का हो चूका है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1995 में हुआ था। इसके अलावा इस मन्दिर की सबसे ख़ास बात यह की यहाँ वर्ष 2002 से 24 घंटे रामचरित मानस का पाठ किया जा रहा है साथ ही अखंड दीप प्रज्वलित किया जा रहा है।लोगों का मानना है की यहाँ सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, साथ ही हर शनिवार को भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।
*इस मंदिर से जुड़ी कहानी*
ऐसा माना जाता है की बाबा त्रिवेणी नाम के एक व्यक्ति थे जिनके सपने में हनुमान जी ने दर्शन दिए और कहा की वे एक पेड़ में फसें हुए उन्हें बाहर निकालें, ऐसा सपना उनको कई बार उसके बाद बाबा त्रिवेणी जी उस पेड़ के पास गए और उस पेड़ को काटकर देखा तो दंग रह गए, सच में वहाँ हनुमान जी की मूर्ति थी।इसके बाद मंदिर की स्थापना की और मूर्ति को स्थापित किया गया है, कई सालो बाद पता चला की मूर्ति के आकार में भी बदलाव हो रहा हो है और समय से साथ बढ़ रहा है। इस बात से लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं और इस हनुमान जी के दर्शन करने पहुँचते हैं।
*दर्शन के लिए कैसे पहुंचे*
सरगुजा के लुंड्रा विकासखंड के लमगांव में स्थित हनुमान मंदिर तक पहुँचना बेहद ही आसान है, यह अंबिकापुर से लगभग 22 किलोमीटर की दुरी पर हैं, नेशनल हाईवे 43 में लमगांव पास मंदिर का पहला द्वार बनाया गया है। इस द्वार से सीधे आगे लगभग 2.5किलोमीटर आगे जाने पर आप मंदिर तक पहुँच जायेंगे आप अपने दो या चार पहिये वाहन से आसानी से पहुँच सकते हैं।
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