सरकार अस्पताल में मरीज को सीमेंट की बेंच पर लिटाकर चढ़ा दी ग्लूकोज

बलरामपुर। सरकारी अस्पतालों में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की संवेदनहीनता बढ़ती ही जा रही है। गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को सीमेंट के बेंच पर लिटा कर ड्रिप लगाई जा रही है। स्वास्थ्य कर्मी मरीजों से सिरिंज व ग्लूकोज की बोतल बाहर से मंगवाते हैं। ऐसे में मुफ्त उपचार की आस लेकर अस्पताल आने वाले मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है।
पेट दर्द व उल्टी से पीड़ित ग्राम पंचायत गनवरिया के मजरे टूटेपुरवा गाँव निवासिनी नन्दनी मिश्रा गंभीर हालत में अस्पताल पहुँची। वार्ड ब्वाॅय ने उन्हें पैथालोजी कक्ष के सामने स्थित बरामदे में सीमेन्ट की बेंच पर लिटाकर ड्रिप लगा दी। मरीज के पति दिनेश कुमार ने बताया कि 550 रुपये में ग्लूकोज की बोतल व सिरिंज सहित अन्य सामान बाहर से खरीद कर लाए हैं। बिना बिस्तर के बेंच पर लेटने से पत्नी की पीठ अकड़ गई है।
श्रीनगर कटुवा गाँव निवासी मालिकराम उल्टी-दस्त व पेट दर्द से पीड़ित बेटी कनक को लेकर अस्पताल पहुँचे। डॉक्टर ने मरीज को देखने के बाद बाहरी सामान व दवा का पर्चा पकड़ा दिया। मालिकराम ने बताया कि सिर्फ नाम का सरकारी अस्पताल है, यहां कुछ नहीं मिलता। 850 रुपये में बाहर से दवा खरीदकर लाए हैं। स्वास्थ्यकर्मी ने बेटी को कूड़ेदान के किनारे लिटाकर ड्रिप लगाई है। अस्पताल की ओपीडी में भीड़ दिखी। दवा काउन्टर, इंजेक्शन कक्ष व ओपीडी के किनारे स्थित एक्सरे कक्ष के बाहर मरीज धक्का-मुक्की करते दिखे।
सीएचसी अधीक्षक डॉ० प्रणव कुमार पान्डेय ने बताया कि ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण मैं करीब दो घंटे से कमरे के बाहर नहीं निकल सका। बेंच पर लिटाकर मरीज को ड्रिप लगाए जाने के सम्बन्ध में फार्मासिस्ट से जानकारी ली जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० सुशील कुमार का कहना है कि सीएचसी शिवपुरा में मरीजों को भर्ती करने के लिए पर्याप्त मात्रा में बेड उपलब्ध हैं। मरीज को बेंच पर लिटाकर बोतल क्यों लगाई गई, इस सम्बन्ध में अधीक्षक से पूछताछ कर ड्रिप लगाने वाले फार्मासिस्ट का वेतन रोका जाएगा।
*रिपोर्ट– बी०पी० बौद्ध*
*ब्यूरो चीफ बलरामपुर*
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