
पूर्वांचल में कभी बोलती थी माफिया अतीक की तूती, नारायण सिंह परिहार ने हिला दिया था साम्राज्य
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या का मामला लगातार सुर्खियों में है।अतीक की हत्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं।एक दौर ऐसा भी था जब अतीक के नाम की उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में तूती बोला करती थी।उसी दौर में एक थानाध्यक्ष ने अपने कार्यकाल के दौरान अतीक अहमद पर शिकंजा कसना शुरू किया और उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।ये झांसी जिले के मऊरानीपुर तहसील के ग्राम चुरारी के रहने वाले नारायण सिंह परिहार हैं।
नारायण सिंह परिहार चर्चित इंवेस्टिगेशन ऑफिसर रहे हैं। उन्होंने अतीक के अपराधों से जुड़े काले कारनामों को सरकारी डायरी में दर्ज कर अतीक को जेल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।नारायण सिंह परिहार को साल 2006-2007 में प्रयागराज के मेजा थाने का चार्ज मिला था।तीन महीने बाद उन्हें सराय ममरेश का थानाध्यक्ष बनाया गया और छह महीने बाद ही उनका तबादला सिविल लाइन थाने में कर दिया गया।
नारायण सिंह परिहार ने सिविल लाइन थाने में तैनाती के दौरान सईद अहमद की जमीन पर तत्कालीन सांसद अतीक अहमद ने आठ सौ वर्गमीटर में 28 दुकानें बनाकर अवैध कब्जा कर लिया था।वहीं साल 2007 में 25 सौ वर्गमीटर में बनी दुकानों को सांसद अतीक अहमद ने गुंडई के दम पर जैन बंधुओं को बेचकर एक करोड़ बैंक ड्रॉफ्ट और चेक अपने खाते में ट्रांसफर करवाकर भुगतान भी निकाल लिया था, जबकि दुकानों के बिकने से मिलने वाला पैसा सईद अहमद को मिलना चाहिए था।इसी मामले में अतीक पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।सईद अहमद की तहरीर पर अतीक के खिलाफ इसी मामले में हाईकोर्ट ने अतीक की तीन बार जमानत भी कैंसिल की थी।
नारायण सिंह परिहार प्रयागराज में साल 2006 से 2011 तक रहे थे।उनका पहला कार्यकाल मेजा और दूसरा सराय ममरेश थाने का था।इसके बाद उनका तीसरा कार्यकाल शाहगंज, चौथा करैली और पांचवा कीटगंज का रहा।इन तीनों जगहों पर नारायण सिंह परिहार थानाध्यक्ष रहे।
नारायण सिंह परिहार को अतीक के खिलाफ तीसरा मामला राजू पाल हत्याकांड का मिला था।राजू पाल हत्याकांड में सात नए आरोपी सामने आए थे,जिनमें अब्दुल कवि और गुड्डू मुस्लिम भी शामिल थे।अब्दुल कवि को एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने राजू पाल हत्याकांड से सांसद अतीक अहमद के प्रभाव में यह कहते हुए बाहर कर दिया था कि इस नाम और पते का कोई व्यक्ति नहीं है।अतीक से जुड़े छह मुकदमों की इंवेस्टिगेशन करने वाले नारायण सिंह परिहार का दावा है कि दिसंबर 2004 में पूर्व विधायक राजू पाल पर अतीक के गुर्गों ने अतीक के भाई के साथ मिलकर जानलेवा हमला किया था। इस मामले की दोबारा जांच होने पर गुनाहों का लंबा चिट्ठा सामने होगा।
बता दें कि माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल को तीन शूटरों ने कैमरों के सामने प्रयागराज में हत्या कर दी थी।पुलिस ने तीनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है।वहीं अब यह अतीक और अशरफ की हत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। हत्या की जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।
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