जरा याद उन्हें भी कर लो’ कार्यक्रम का किया गया आयोजन

बलरामपुर। छात्र छात्राओं के विकास व बौद्धिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए राष्ट्रनायकों, युग पुरुषों के जीवन और उनके संघर्षों से परिचित कराने तथा उनके सिद्धांतों एवं आदर्शों को आत्मसात करने के लिए जेएसआई स्कूल में “जरा याद उन्हें भी कर लो” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आए हुए वक्ताओं ने आचार्य चाणक्य के जीवन पर प्रकाश डाला।
बलरामपुर जनपद के पचपेड़वा के जेएसआई स्कूल में आयोजित ‘ज़रा याद उन्हें भी कर लो’ कार्यक्रम में युगपुरुषों और महानायकों के जीवन और उनकी वीर गाथा से बच्चों को रूबरू कराया गया और आचार्य चाणक्य के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा की गई। मुख्यवक्ता डॉ० उमेश पटेल (प्रवक्ता) ने कहा कि चाणक्य एक कुशल रणनीतिकार, राजनीतिज्ञ व तक्षशिला विश्वविद्यालय में आचार्य थे। उनका जीवन संघर्षों व रहस्यों से भरा पड़ा है।
उन्होंने छोटी छोटी रियासतों में बंटे भारत को एकीकृत करने का भी प्रयास किया। एलएमटी के अध्यापक वसीम खान ने कहा कि आचार्य चाणक्य के विचार व नीतियां आज भी प्रसांगिक हैं। वह बहुत ही सादगी पूर्ण जीवन जीते थे। एक बड़े साम्राज्य का प्रधानमंत्री होने के बाद भी वह साधारण सी कुटिया में रहते थे।उनका कहना था कि राजा को अपने राजधर्म का पालन करना चाहिए और जनता के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।
प्रबंधक सग़ीर ए० ख़ाकसार ने कहा कि चाणक्य का मानना था कि संविधान ही सर्वोपरि है। आज से 2300 साल पहले उन्होंने धर्मशास्त्र व परम्परा आधारित राज्य शासन को नकार दिया था और संविधान को ही जनकल्याण के लिए हितकारक बताया था। अध्यापक किशोर श्रीवास्तव ने कहा कि आचार्य चाणक्य यवनों के आक्रमण से बहुत आहत थे। वह सभी छोटे छोटे राज्यों को एकत्र कर यवनों को परास्त करना चाहते थे। उन्होंने भारत को एकीकरण किया, जो छोटी छोटी रियासतों में बंटा हुआ था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अध्यापक रवि प्रकाश श्रीवास्तव एवं संचालन किशन श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुदस्सिर अंसारी, अलका श्रीवास्तव, साजिदा खान, नेहा खान, सुशील यादव, सचिन मोदनवाल, शमा, पूजा विश्वकर्मा, फरहान खान, तबस्सुम, वन्दना चौधरी, अंजली कसौधन आदि का सराहनीय योगदान रहा।
रिपोर्ट– बी०पी० बौद्ध
ब्यूरो चीफ बलरामपुर
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