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अदालत के आदेश पर कानून को ताक पर रखने वाले एसओ अनिरुद्ध सिंह पर गम्भीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

अदालत के आदेश पर कानून को ताक पर रखने वाले एसओ अनिरुद्ध सिंह पर गम्भीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
तो वहीं दूसरी तरफ लापरवाह अफसरों पर कार्यवाही की लटकी तलवार, जिससे तानाशाह पुलिस अफसरों में मची हड़कम्प
यह मामला कहीं और का नहीं जनपद के बहुचर्चित थाना कोतवाली देहात का है।
जहां के एसओ अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ स्पेशल जज पाक्सो एक्ट पवन कुमार शर्मा की अदालत के आदेश के बाद दर्ज हुआ मुकदमा,सीओ लम्भुआ राधेश्याम शर्मा को मिली है जांच।करीब 14 वर्षीय किशोरी से रेप के बाद प्रेग्नेंट होने का सीधा प्रमाण होने के बावजूद पुलिस मुकदमा दर्ज करने में लगातार बरत रही थी लापरवाही, तो वहीं कोर्ट के जरिए थानाध्यक्ष से मांगे गये जवाब में भी एसओ अनिरुद्ध सिंह नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब,जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कल मंगलवार को थानाध्यक्ष के खिलाफ भादवि की धारा-166(ए) एवं पाक्सो एक्ट की धारा 21 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने का दिया था आदेश।
कोर्ट के आदेश पर थानाध्यक्ष के खिलाफ गम्भीर मामले में दर्ज हुआ मुकदमा”,सूत्रों की माने तो अहिमाने में हुई बड़ी चोरी की वारदात एवं प्रधान ढाबा के सामने दिनदहाड़े हुए मर्डर के अलावा किशोरी से हुए रेप सम्बन्धी गंभीर प्रकरण में लापरवाही बरतने पर पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा ने एसओ को किया लाइन हाजिर,अभी अन्य जिम्मेदारो पर भी हो सकती है कार्रवाई,थानाध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह से चार्ज छीनकर अखंडनगर के थानाध्यक्ष रहे कृष्ण मोहन सिंह को मिला कोतवाली देहात थाने का प्रभार।पीड़ित पक्ष ने 14 वर्षीय किशोरी के साथ रेप करने के मामले में आरोपी सेबू पुत्र मोहम्मद इसरार निवासी ओदरा थाना कोतवाली देहात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को लेकर दी थी तहरीर,कोई सुनवाई ना होने पर बीते 24 जनवरी को पुलिस अधीक्षक को जरिए रजिस्टर्ड डाक दी गई थी घटना की सूचना,रजिस्टर्ड डाक से घटना की सूचना मिलने के बाद भी जांच के नाम पर पुलिस कई दिनों तक दौडाती रही पीड़िता की अर्जी और करते रहे टालमटोल,एफआईआर ना दर्ज करने का उचित कारण नहीं बता सके थानाध्यक्ष,जिसकी मिली कोर्ट से सजा। जोकि मामला बीते एक फरवरी को ही पीड़िता की मां की अर्जी पर कोर्ट से हुए आदेश के अनुपालन में पीड़िता से रेप के मामले में भी मुकदमा दर्ज कर चल रही जांच,मिली जानकारी के मुताबिक बीते 24 जनवरी को जरिये रजिस्ट्री एसपी से हुई शिकायत के बाद एडिशनल एसपी व इनके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष कोतवाली देहात व उनके निर्देशन में एसएसआई दीपेंद्र विक्रम सिंह एवं उनके निर्देशन में हेड कांस्टेबल राकेश मौर्या करते रहे जांच पर जांच,जांच के नाम पर हफ्ते भर दौड़ाई जाती रही अर्जी और इतने गम्भीर मामले में भी नहीं दर्ज किया गया मुकदमा,जबकि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट से जारी विधि व्यवस्थाओ एवं दण्ड प्रक्रिया संहिता के नियमो के मुताबिक संज्ञेय अपराध से जुड़े मामले में प्राथमिक जांच का पुलिस को नहीं है अधिकार,बल्कि हर हाल में एफआईआर दर्ज करना है अनिवार्य,फिर भी अनुचित लाभ के चक्कर मे मनमाना कानून चलाती है पुलिस,बड़े अफसर भी ऐसे मामले में नहीं देते ध्यान,सिर्फ मामला बढ़ने के बाद ही दिखाने के लिए किया जाता है कानून का पालन,पुलिस अफसरों की घोर लापरवाही पर कोर्ट ने लिया संज्ञान,अन्य अफसरों व पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध,बड़े अफसरों ने भी मुकदमा दर्ज कर विवेचना के लिए नहीं बल्कि मात्र जांच के लिए किया था मार्क,सभी है मुकदमा ना दर्ज करने से जुड़े मामले के जिम्मेदार।

अयोध्या ब्यूरो रिपोर्ट

India News Darpan

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