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धर्म परिवर्तन कराने वाले मौलाना को 10 साल की हुई सजा

 

बलरामपुर। जनपद में जरवा कोतवाली के हलौरा गाँव निवासी मौलाना मोहम्मद जमील को महिला व उसके चार बच्चों के अपहरण व धर्मांतरण के आरोप में 10 साल कारावास की सजा सुनाई गई है। जनपद न्यायाधीश लल्लू सिंह ने कारावास के साथ ही 50 हजार रुपये अर्थदंड व पीड़ित विष्णु को पांँच लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया है।
शासकीय अधिवक्ता कुलदीप सिंह ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि विष्णु पुत्र छोटेलाल निवासी हलौरा ने 12 जून को जरवा कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। कहा था कि उसकी पत्नी गाँव के ही जमील के यहां मजदूरी करने जाती थी, जमील ने उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर उसके चार छोटे-छोटे बच्चों समेत उनका धर्म परिवर्तन करा कर हिन्दू से मुसलमान बना दिया। वादी के दो नाबालिग पुत्रों का खतना करा कर उनका नाम बदल दिया। पुलिस ने विवेचना के पश्चात अभियुक्त जमील पुत्र रहमतुल्लाह निवासी ग्राम हलौरा के विरुद्ध आरोप पत्र धारा 3 सपठित धारा 5 उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम 2021 में भेजा। सत्र सुपुर्द होने के पश्चात मुकदमे का विचारण जिला एवं सत्र न्यायालय बलरामपुर में हुआ। अभियोजन की ओर कुल 5 गवाहों को पेश किया। डॉक्टर ने अपने बयान में दोनों नाबालिग बच्चों के खतना होने की पुष्टि की।
दो नाबालिग पुत्रियों को भी अपने धर्म के मुताबिक दूसरा नाम दे दिया। आठ साल के बेटे का मदरसे में दाखिला कराया, जिसमें पिता के स्थान पर अपना नाम दर्ज करा दिया। पहले तो पीड़ित अपनी पत्नी को वापस लाने के लिए कोतवाली व अधिकारियों की चौखट पर दस्तक देता रहा। बाद में उसने अपने बच्चों को मतांतरण से बचाने के लिए गुहार लगाई।
नौ जून को उसने बच्चों का मतांतरण करा दिया। 12 जून को मुकदमा दर्ज करने के बाद जरवा पुलिस आरोपित को महिला व बच्चों समेत बरामद कर थाना ले आई। दोनों बेटों का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। मेडिकल में बच्चों के मतांतरण की पुष्टि हुई थी। जिला एवं सत्र न्यायालय में अभियोजन की ओर से पाँच गवाहों का बयान दर्ज कराया गया।
अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए प्रकरण को सामूहिक मतांतरण माना गया। इसे सामाजिक समरसता व सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध बताया। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अभियुक्त को धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत 10 वर्ष कारावास, 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा मिली है। संभवत: यह प्रदेश का पहला मामला है, जिसमें इस अधिनियम के तहत सजा सुनाई गई है।

रिपोर्ट– बी०पी० बौद्ध
ब्यूरो चीफ बलरामपुर

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