
उतरौला/बलरामपुर। जनपद के उतरौला तहसील में लेखपाल और अधिवक्ता विवाद में जिला प्रशासन के अड़ियल रुख के बाद वकीलों ने शनिवार को गिरफ्तारी देकर विरोध जताया। गिरफ्तारी के बाद अधिवक्ता को कोतवाली उतरौला लाया गया। जहाँ पर वकीलों ने जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने लगभग 2 घंटे बाद अधिवक्ताओं को बिना शर्त रिहा कर दिया।
अधिवक्ता संघ लेखपाल के निलंबन, तहसीलदार और एसडीएम के तबादले को लेकर 23 दिसम्बर से तीन सूत्रीय मांग को लेकर आन्दोलन कर रखा है। 17 जनवरी व 19 जनवरी को वकीलों ने चक्का जाम कर विरोध जताया। चक्का जाम स्थल पर पहुँचे एडीएम ने वार्ता के लिए अधिवक्ता संघ के प्रतिनधि मण्डल को बलरामपुर बुलाया। परन्तु प्रतिनिधि मण्डल से वार्ता विफल हो गई। शनिवार को अधिवक्ताओं ने आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में सभागार के सामने जमकर नारेबाजी की और उसके बाद तहसील परिसर से निकलकर कोतवाली उतरौला में गिरफ्तारी दी।
सम्पूर्ण समाधान दिवस में आ रहे सीडीओ को कोतवाली जा रहे अधिवक्ताओं के आक्रोश का सामना करना पड़ा। अधिवक्ताओं ने सीडीओ वापस जाओ के नारे लगाए। दो घन्टे बाद अधिवक्ताओं को बिना किसी शर्त के रिहा कर दिया गया। प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं के आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इन्तजाम किये गए थे। भारी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान मौजूद रहे।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिन्हा ने बताया कि जेल भरो आन्दोलन में न आने वाले अधिवक्ताओं के विरुद्ध संघ कठोर कार्रवाई करेगा। आन्दोलन में शामिल न होने वाले अधिवक्ता को संघ की सदस्यता से निष्कासित किया जाएगा।
गिरफ्तारी देने में अधिवक्ता ओ०पी० सिंह, के०सी० गोपाल, अजीत सिंह, आलोक गुप्ता, दिनकर, अमित श्रीवास्तव, रमेश चतुर्वेदी, धर्मराज यादव, रघुवंश सिंह, मार्कण्डेय मिश्र, राम राज यादव, प्रह्लाद यादव, राजमणि तिवारी, निजाम अंसारी, आशीष कसौधन, अखिलेश यादव, जगदीश वर्मा, बृजेश वर्मा, नीरज गुप्त, मारुति नन्दन मिश्र, अजय मिश्र, सुनील तिवारी, अखिलेश तिवारी, महेन्द्र पान्डेय, देवेन्द्र कुमार, परशुराम यादव, बबर अली सहित सैकड़ों अधिवक्ता शामिल रहे।
रिपोर्ट– बी०पी० बौद्ध
ब्यूरो चीफ बलरामपुर
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