पूरन वर्मा/ तिल्दा नेवरा शहर कहो या ग्रामीण खुले आम सड़को पर बैठें मवेशियों पर कोई सुध लेने वाला नही ठीक इसी प्रकार सड़को पर ओवर लोड अनियंत्रित गाड़ियों पर कोई सुध लेने वाला नही इन्ही ओवर लोड़ की चक्कर व हड़बड़ी के चलते भारी वाहनों को धुँवाधार स्पीड दौड़ाया जा रहा हैं शहर से होकर गुजरने वाले ओव्हर लोड वाहनों पर कार्रवाई नहीं होने से मालवाहक वाहन मालिक व चालकों के हौसले बुलंद हैं। यातायात नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। ओवरलोडिंग एक बहुत बड़ी समस्या है और शहर में ऐसे ओवरलोड वाहन सरेआम बिना किसी डर के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सड़कों पर सुबह से देर रात तक ओवरलोड वाहन दौड़ते नजर आते हैं। मोटी कमाई के फेर में वाहन मालिकों को यातायात नियमों का ध्यान ही नहीं रहता। दूसरी ओर यातायात विभाग द्वारा भी ऐसे माल वाहक वाहनों पर कार्रवाई नहीं की जाती। ऐसे में वाहन मालिक व चालकों के हौसले बुलंद हैं। ओवरलोड वाहन लोगों को तो नजर आ जाते हैं लेकिन पुलिस को क्यों नहीं दिखाई देते? यह एक बड़ा सवाल है। ओवरलोडिंग के कारण आए दिन कोई न कोई बड़ा हादसा का शिकार होते रहते हैं। लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती और न ही इनसे कोई सबक सीखा जाता।अंधाधुंध तेज गति वाहनों से आम लोग भी पीड़ित रहते हैं सड़को पर चलने वाले राहगीर भारी वाहनों की अंधाधुंध स्पीड से परेशान हैं आम लोग इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाते और पुलिस अधिकारी या आरटीओ डिपार्टमेंट इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता यहीं कारण है कि यह ओवरलोड वाहन बिना किसी डर के सड़कों पर दौड़ते हैं।बता दें कि एक तो तिल्दा में ट्रैफिक जाम की बहुत बड़ी समस्या है साथ ही राहगीर रेत भरकर चलने वाली हाईवा गाड़ियों से व लापरवाह हाइवा ऑपरेटरों से बहुतों ही परेशान हैं सुबह-सुबह दोपहिया वाहन में कार्य पर जाने वाले राहगीरों ने बताया की ये वाहन सुबह-सुबह अपनी गति खोकर अंधाधुंध तेज गति से ओवर लोड़ रेत भरे हाईवा को दौड़ाया जाता हैं साथ ही गाड़ी में भरे रेत आँख में पड़ते हैं व रेत की परत रोड किनारे इकट्ठा हो करके दो पहिया वाहनों के लिए मुसीबत बन गए हैं जो दोपहिया व अन्य राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं दोपहिया चालक भी हैं लापरवाह की सिर्फ चालान कटने से बचने के लिए ही हेलमेट पहनते हैं। जहां पुलिस नहीं होती हैं वहाँ हेलमेट उतार दिया जाता है वही सड़कों पर चलने वाले रेत से भरे हाईवा,राईस मीलों से भूसा भरा हुआ ट्रक व इन दिनों ज्वार से लदा ट्रैक्टर जो कि सड़कों को घेर दे रहे हैं वहीं ट्रॉली में पराली या भूसा इतना ज्यादा भर लिया जाता है कि सड़क पर दूसरे वाहनों को निकलने के लिए भी रास्ता नही बचता।शासन प्रसाशन के तमाम प्रयासों के बाद भी ओवरलोड वाहनों का संचालन बेधड़क हो रहा है। चाहे वह माल वाहक हो या सवारी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा हैं।लेकिन इस ओर प्रसाशन चुप्पी साधे हुए हैं शायद जानकर अनजाने बने हुए हैं कार्यवाही होते भी हैं तो मात्र-मात्र नाम मात्र व एक से दो दिन भारी वाहन अपनी दिशा निर्देशों का पालन किया जाता हैं चार दिन बाद देखने पर ये वाहन अपनी जागीरी दारी पर आ जाते हैं व सड़को पर चलने वाले आम लोगों सहित प्रसाशन को भी मूँह चिड़ाते नजर आते हैं।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
जिले के ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई तो ना के बराबर होती है। शायद यही वजह है कि शहर में क्षमता से अधिक लोड वाले वाहनों की तादात बढ़ती जा रही है। हालांकि विभाग बीच-बीच में चौक चौराहों पर ओवरलोड वाहनों की जांच कर कार्रवाई की बात कहती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जब भी इस तरह की कार्रवाई होती है तो अन्य प्रांत के कुछ ओव्हरलोड वाहनों के चालकों से चालान वसूल किया जाता है जबकि शहर में हर रोज दौड़ने वाले मालवाहक वाहनों पर कार्रवाई ही नहीं हो पाती।
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