उत्तर प्रदेश

नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को किया जाएगा जागरूक  

*मेडिकल छात्रों व कुलियों को खिलाई फाइलेरिया से बचाव की दवा एमडीए राउंड जारी, 27 तक चलेगा, सभी खाएं दवा*

नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को किया जाएगा जागरूक

 

शाहजहाँपुर, 22 फरवरी 2023 फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में चल रहे सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान के तहत बुधवार को मेडिकल कॉलेज स्टाफ और रेलवे स्टेशन पर कुलियों को दवा खिलाई गई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जिला चिकित्सालय में 200 एम.बी.बी.एस, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल छात्र–छात्राओं को फाइलेरिया से बचाव की दवा (एलबेंड़ाजाल और डीईसी) का सेवन कराया गया।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एस.पी.गंगवार के अनुसार जनपद के 34 लाख लोगों को लक्ष्य मानते हुए मंगलवार शाम तक 19 लाख लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि 10 फरवरी से एमडीए कार्यक्रम के तहत घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाई जा रही है। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर भी दवा का सेवन कर सकता है। उन्होंने अपील किया कि सभी दवा का सेवन आशा के सामने सामने खुद करें और बच्चों को भी कराएं।डीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमार को छोड़कर सभी को करना है। पांच वर्ष तक लगातार हर वर्ष एक बार दवा खा लेने से फाइलेरिया से बचने या नियंत्रित करने में मदद मिलती है। फाइलेरिया की दवा पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया की गंभीरता समझाने के लिए विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। इसके लिए निजी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से गुरुवार से 15 ब्लॉक में नुक्कड़ नाटक का आयोजन कर लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। डॉ. गंगवार ने बताया कि दवा सेवन के बाद हल्का बुखार, पेट दर्द, हाथ पैर में दर्द, सिर दर्द, जी मिचलाना या उल्टी-चक्कर आए तो घबराएं नहीं। पानी पिएं। खुले में कुछ देर आराम करें और ज्यादा परेशानी होने पर पास के स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों को दिखाएं। ऐसा शरीर में फाइलेरिया के परजीवी होने से हो सकता है, जो दवा खाने के बाद मरते हैं। ऐसी प्रतिक्रिया कुछ देर में स्वतः ठीक हो जाती है।

उन्होंने बताया कि यह बीमारी इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसके लक्षण ही 10 से 15 वर्ष बाद दिखते हैं और जब दिखते हैं तब इसका कोई उपचार नहीं बचता। फाइलेरिया से जान तो नहीं जाती है लेकिन अगर व्यक्ति एक बार पीड़ित हो गया तो वह ठीक नहीं हो सकता। यह बीमारी व्यक्ति को जीवन भर के लिए अपंग बना देती है। डीएमओ ने बताया कि हाथीपांव का कोई इलाज़ नहीं है, दवा ही बचाव है। इसका मुख्य उद्देश्य आंतो में पाए जाने वाले कीड़ों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और बच्चों में मृदा संचारित कृमि का पूर्ण उन्मूलन करना है। खाने से पहले और शौच के बाद हाथों को अच्छी तरह से साफ़ करना चाहिए। पैरों में चप्पल/जूते अवश्य पहनें। फलों/सब्जियों को साफ़/सुरक्षित पानी से धोकर ही उपयोग करें। *विमलेश कुमार तहसील रिपोर्टर पुवायां*

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