शिक्षकों के सम्मान से सपा ने साधा सियासी संदेश, 50 शिक्षको को सम्मानित किये सांसद अवधेश प्रसाद

संवाददाता सीताराम यादव इंडिया न्यूज़ दर्शन
शिक्षकों के सम्मान से सपा ने साधा सियासी संदेश, 50 शिक्षको को सम्मानित किये सांसद अवधेश प्रसाद
फैजाबाद/अयोध्या। गुलाब बाड़ी स्थित समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में मंगलवार को “समाजवादी शिक्षक रत्न सम्मान समारोह” आयोजित कर सपा ने शिक्षक समाज को सम्मान देने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी दिया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले 50 शिक्षकों को मुख्य अतिथि सांसद अवधेश प्रसाद ने सम्मानित किया।
सम्मान समारोह में शिक्षकों को माला पहनाकर, अंगवस्त्र भेंट कर तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया का चित्र देकर सम्मानित किया गया। मंच से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि शिक्षक केवल विद्यालय में पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और देश के भविष्य को गढ़ने वाला निर्माता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सपा जिला अध्यक्ष पारसनाथ यादव और संचालन महासचिव बख्तियार खान ने की शिक्षक एमएलसी प्रत्याशी कमलेश यादव, आयोजक बाबूराम गौड़, आयोजक डॉ. प्रशांत कुमार प्रजापति तथा प्रदेश सचिव एवं जिला प्रभारी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र छोटेलाल यादव, गोसाईगंज विधानसभा प्रभारी राम लोटन निषाद, बलराम मौर्य, इंद्रपाल यादव, बृजेश सिंह चौहान, रामबख्श यादव, महिला सभा की जिला अध्यक्ष सरोज यादव, पूजा वर्मा, सहित पार्टी के अनेक नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सपा का सियासी संदेश—शिक्षक सिर्फ वोट नहीं, समाज की रीढ़
कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी की ओर से शिक्षक समाज के सम्मान और स्वाभिमान को प्रमुखता से उठाया गया। सपा नेताओं ने कहा कि शिक्षक समाज की नई पीढ़ी तैयार करता है, इसलिए उसके सम्मान को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।
सपा नेताओं ने निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता और चुनाव के समय बड़े-बड़े मंच सजाने से सम्मान नहीं होता, सम्मान तब होता है जब समाज के शिक्षक, कर्मचारी और मेहनतकश वर्ग को वास्तविक प्रतिष्ठा दी जाए।
सपा की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि पार्टी शिक्षक समाज के सम्मान को केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी मानती है।
“राजनीति में नेताओं के सम्मान के लिए मंच और मालाएं बहुत देखीं, लेकिन क्या शिक्षक के सम्मान के लिए भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जाती है?”
सपा नेताओं ने कहा कि शिक्षक समाज को केवल चुनाव के समय याद करने की राजनीति नहीं चलनी चाहिए। शिक्षक का सम्मान उनके स्वाभिमान और अधिकारों के सम्मान से जुड़ा होना चाहिए।
अयोध्या में आयोजित इस कार्यक्रम को केवल सम्मान समारोह के रूप में नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक माहौल के लिहाज से भी देखा जा रहा है। 50 शिक्षकों का सम्मान और शिक्षक समाज के स्वाभिमान की बात करके सपा ने साफ संकेत दिया कि शिक्षक वर्ग से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में मजबूती से उठाया जाएगा।
शिक्षक समाज के सम्मान और अधिकारों पर भी उसी गंभीरता से बात होनी चाहिए, जिस गंभीरता से चुनावी राजनीति के दूसरे मुद्दों पर होती है।
समारोह में सम्मानित शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए आयोजकों ने कहा कि समाज में शिक्षक का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक का सम्मान करना आने वाली पीढ़ी के भविष्य का सम्मान करना है।
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